नई कस्टम नीति को मिली मंजूरी, ऑनलाइन खरीदी जाएंगी खरीफ की फसलें

नई कस्टम नीति को मिली मंजूरी, ऑनलाइन खरीदी जाएंगी खरीफ की फसलें

चंडीगढ़
वीडियो के जरिये होगा मिलर्स का पंजीकरण और आवंटन
प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए बनाया जाएगा ऑनलाइन पोर्टल
विस्तार
कोरोना महामारी के दौरान पहली बार पंजाब में खरीफ की फसलों की ऑनलाइन खरीद फरोख्त की जाएगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत चावल मिलों की वीडियो के द्वारा सत्यापन, आवंटन और पंजीकरण किया जाएगा। खरीफ की फसल के 2020-21 सीजन के लिए राज्य की धान से संबंधित नई कस्टम मिलिंग नीति के अंतर्गत ऑनलाइन किया जाएगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में नई नीति को मंजूरी दी गई। बैठक में प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक पोर्टल बनाने का भी निर्णय किया गया।

नई नीति के तहत मिलों के आवंटन, पंजीकरण, रिलीज ऑर्डर लागू करना, आरओ फीस और चुंगी जमा करावाना और इसके अलावा स्टॉक की निगरानी ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत पूरी की जाएगी। राज्य की सभी खरीद एजेंसियां, पंजाब स्टेट वेयर हाउसिंग कारपोरेशन, जिसमें भारतीय खाद्य निगम और चावल मिल मालिक वेबसाइट के जरिये ही इस प्रक्रिया में प्रतिभाग कर पाएंगे। इस कार्य के लिए राज्य का खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
नई नीति में मिलों को बीते वर्ष के दौरान आरओ धान सहित कस्टम मिल्ड धान की मिलिंग की तुलना में चावल मुहैया करवाए जाने की तारीख को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त प्रतिशत के हिसाब से आर्थिक लाभ दिया जाएगा। जिन मिलों ने 31 जनवरी, 2020 तक मिलिंग की समूची प्रक्रिया पूरी कर ली थी, वह नीति के अनुसार, 2019-20 में छटाई किए गए मुफ्त धान के अतिरिक्त 15 प्रतिशत हिस्से के भी हकदार होंगे।
जिन्होंने 28 फरवरी, 2020 तक चावल मुहैया करवाने की प्रक्रिया पूरी की होगी, उनको अतिरिक्त 10 प्रतिशत धान की फसल मुफ्त मिलेगी। एक अक्तूबर से शुरू हो रहे खरीफ सीजन के दौरान राज्य द्वारा 170 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जाने की संभावना है।

जमा करानी होगी बढ़ी हुई बैंक गारंटी
स्टॉकों की जमानत के तौर पर इस वर्ष मिल मालिकों को बढ़ी हुई बैंक गारंटी जमा करवानी पड़ेगी, जो कि बीते वर्ष 5000 मीट्रिक टन पर 5 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 3000 मीट्रिक टन से अधिक मात्रा के अलॉट होने योग्य मुफ्त धान की खरीद कीमत के 10 प्रतिशत के बराबर होगी। बैंक गारंटी जमा करवाने के लिए शुरुआती हद कम करने के साथ 1000 से अधिक और मिलें सीधी निगरानी के अंतर्गत आ जाएंगी।

150 मीट्रिक टन करनी होगी खरीद
नई नीति के तहत एक मिलर को अपने खाते में 150 मीट्रिक टन कम-से-कम धान की फसल खरीदनी होगी, या उसे न वापस करने पर 5 लाख रुपए की रकम खजाने में जमा करवानी पड़ेगी। इसके अलावा 5 लाख रुपए की और रकम वापसी योग्य सिक्योरिटी के तौर पर पनग्रेन के खाते में ऑनलाइन जमा करवानी होगी।

नहीं हो पाएगा धान का और इस्तेमाल
नई नीति में धान की फसल के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी व्यवस्था की गई है। इसके लिए आरओ धान को कस्टम मिलिंग सिक्योरिटी के दायरे में लाया गया है। मिल मालिकों को भंडारण किये गए पूरे धान या इसके कुछ हिस्से जिसमें आरओ धान की फसल भी शामिल होगी, के लिए प्रति मीट्रिक टन के तौर पर 125 रुपए संबंधित एजेंसी के पास जमा करवाने पड़ेंगे।

नई मिलों का आवंटन भी हुआ तय
नई नीति के तहत नई स्थापित चावल मिलों को एक टन क्षमता के लिए 3500 मीट्रिक टन धान की फसल का आवंटन किया जाएगा। 1.5 टन क्षमता बाली मिलों को 4000 मीट्रिक टन धान की फसल मिलेगी। इसके साथ ही 4500 मीट्रिक टन धान की फसल लेने के लिए 2 टन की क्षमता को जरूरी किया गया है। तीन टन की क्षमता रखने वाली मिल को 5500 मीट्रिक टन धान की फसल का आवंटन किया जाएगा।

 

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